Warning on paryavaran : 2050 तक इन 4 चीजों का ध्यान न देने पर भारत में रहना हो सकता है मुश्किल |

Warning on paryavaran : 2050 तक इन 4 चीजों का ध्यान न देने पर भारत में रहना हो सकता है मुश्किल |

Warning on paryavaran: साइंस डायरेक्ट पत्रिका के अनुसार, 2050 तक भारत में धरती पर रहने के लिए गर्मी को रोकने के ठोस उपाय न किए गए हों, तो मुश्किल होगा।

Warning on paryavaran : 2050 तक इन 4 चीजों का ध्यान न देने पर भारत में रहना हो सकता है मुश्किल |
Warning on paryavaran : 2050 तक इन 4 चीजों का ध्यान न देने पर भारत में रहना हो सकता है मुश्किल |

Warning on paryavaran : गर्मी की बदज़्मी में देश कई स्थानों पर आंधी-तूफ़ान मचा रही है। जून के महीने में ही तापमान के बढ़ते रुख ने लोगों को बेहद परेशान कर दिया है। देश के बहुत से इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के चूरू और हरियाणा के सिरसा में तापमान ने नए रिकॉर्ड बना दिया है।

Warning on paryavaran: आईएमडी के अनुसार, मंगलवार को चूरू में 50.5 डिग्री सेल्सियस और सिरसा में 50.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। इस गर्मी के कारण लोगों को अनेक स्थानों पर पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है और कई स्थानों में बिजली की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। इससे कई स्थानों में लोगों की जीवनशैली पर असर पड़ रहा है।

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मौसम विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, साल 2024 की शुरुआत से ही देश में तापमान में बढ़ोतरी का अनुभव किया गया है। विशेष रूप से फरवरी से मई तक हर महीने का तापमान औसतन नॉर्मल से अधिक रहा है। मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इस तापमान में वृद्धि के पीछे जलवायु परिवर्तन का भी बड़ा हाथ है।

उन्होंने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ की कमी के कारण देश के कई हिस्सों में गर्मी का मिजाज अधिक हो गया है। यह स्थिति खासकर कृषि, जलवायु और लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार को उपायों की त्वरित तैयारी करनी चाहिए ताकि आने वाले समय में इस परिस्थिति से निपटा जा सके।

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गर्मी को कैसे रोका जा सकता है?

Warning on paryavaran : गर्मी को कम करने के लिए वैज्ञानिक विभिन्न तकनीकों का अध्ययन कर रहे हैं। इनमें से दो प्रमुख तकनीकों में से एक है कृत्रिम बादलों का निर्माण करना और दूसरी है स्ट्रेटोस्फेरिक एरोसोल स्कैटरिंग प्रवृधि।

स्ट्रेटोस्फेरिक एरोसोल स्कैटरिंग विधि के तहत, 10 किमी ऊपर से बारिश करने की प्रक्रिया होती है। हालांकि,(Warning on paryavaran) बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्मी को कम करने के लिए अधिक पेड़ लगाने और तेल-गैस का उपयोग कम करने जैसे साधारण उपाय हो सकते हैं। इससे वायुमंडल में गर्मी की मात्रा को कम किया जा सकता है और पर्यावरण को भी संरक्षित किया जा सकता है।

भारत की वातावरणिक स्थिति चिंता का विषय है। यहां, तेल-गैस का उपयोग बढ़ रहा है लेकिन इसके साथ ही पेड़ों की कटाई भी तेजी से हो रही है।

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Warning on paryavaran : साइंस डायरेक्ट पत्रिका के अनुसार, गर्मी को रोकने के ठोस उपाय नहीं किए गए तो भारत के लिए आने वाले समय में संवर्धन की चुनौती हो सकती है। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक औसतन तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की बढ़ोतरी की संभावना है। इससे वन्यजीवन और प्राकृतिक संसाधनों पर भी असर पड़ सकता है।

इस चुनौती का सामना करने के लिए, उन्हें साथ मिलकर प्रयास करना होगा ताकि गर्मी को रोकने के लिए समूचा प्रयास किया जा सके और पेड़ों की कटाई जैसी अनुचितताओं का भी निर्मूलन हो सके।

इन आंकड़ों में सुधार कर ही रोकी जा सकती है गर्मी

1. पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी (Warning on paryavaran)

भारत में निर्माण के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी है। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 साल में विकास और निर्माण के नाम पर लगभग 1 करोड़ से अधिक पेड़ काटे गए हैं।

संसद में केंद्र की ओर से दिए गए बयान के अनुसार, साल 2016-19 तक देश में 76 लाख 76 हजार पेड़ सरकार द्वारा काटे गए। 2020-21 में भी 30 लाख पेड़ विकास के नाम पर कटे गए।

सरकार का दावा है कि पेड़ों की कटाई के बजाय उसने पौधों का बगीचा भी बनाया है। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 सालों में देश में 23 लाख हेक्टेयर जंगलों का अंत हो गया है। यह आंकड़ा ग्लोबल फॉरेस्ट वाच ने साल 2023 में जारी किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2002 से 2023 तक सबसे अधिक वनों का क्षति असम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, और मणिपुर में हुआ है। खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार, साल 2015-20 के बीच भारत में वनों की कटाई की दर 668,000 हेक्टेयर प्रति वर्ष थी, जो दुनिया भर में दूसरी सबसे अधिक है।

यह स्थिति पर्यावरण के लिए बहुत चिंताजनक है और सरकार को इसे नियंत्रित करने के लिए सक्रिय उपायों की आवश्यकता है। इससे जलवायु परिवर्तन और बाढ़-बरसात की समस्याओं का सामना करना भी मुश्किल हो रहा है।

इस प्रकार की अंधाधुंध कटाई से प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण की सुरक्षा पर धारा डालती है। इससे जलवायु परिवर्तन, वन्यजीवन, और प्राकृतिक संसाधनों में हानि हो सकती है। सरकार को इसे नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है ताकि हमारी प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।

2.कंस्ट्रक्शन के काम में भी पीछे नहीं (Warning on paryavaran)

Warning on paryavaran : भारत कंस्ट्रक्शन कार्यों में भी बेहतरीन प्रगति हो रही है। पिछले दशक में इसमें अविश्वसनीय वृद्धि देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2014 से 2023 तक नेशनल हाईवे के निर्माण में 60% की वृद्धि दर्ज की गई है।

सड़क मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण 91 हजार किमी में किया गया था, जो अब बढ़कर 1 लाख 41 हजार किमी को पार कर गया है। इस अवधि के दौरान, 4 लेन के निर्माण में भी 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इस वृद्धि के साथ-साथ, नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य भी तेजी से बढ़ रहा है जो देश के सड़क संचार को मजबूती और सुगमता प्रदान कर रहा है। इससे यातायात का अनुभव भी सुधार रहा है और कनेक्टिविटी में भी सुधार हो रहा है।

कनेक्टिविटी के नाम पर ग्रामीण सड़कों के निर्माण में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में प्रतिदिन 11.6 किमी की ग्रामीण सड़कों की निर्माण दर थी, जो की 2023 में बढ़कर 28 किमी प्रति दिन हो गई है।

सड़कों के अलावा बिल्डिंग निर्माण में भी बड़ी रफ्तार से बढ़ोतरी हुई है। ग्लोबल कंस्ट्रक्शन पर्सपेक्टिव और ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुसार, 2025 में भारत में 1.1 करोड़ घरों का निर्माण होगा।

एक अन्य प्राइवेट एजेंसी के अनुसार, कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी बड़ी रफ्तार से बढ़ोतरी आई है और साल 2030 तक इस सेक्टर में 1 अरब मजदूर होंगे, जो निर्माण कार्य करेंगे। यह वृद्धि न केवल रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगी बल्कि भारत की इकाईक ग्रोथ में भी मदद करेगी।

3.ऑटोमोबाइल की खरीदी में भी बढ़ोतरी (Warning on paryavaran)

Warning on paryavaran : तापमान बढ़ाने में कार और अन्य वाहनों का भी काफी योगदान है। यूनिवर्सिटी कॉपरेशन फॉर एटमोसफेरिक रिसर्च के मुताबिक पेट्रोल से चलने वाली कारें कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों को छोड़ती हैं, जिससे तापमान में बढ़ोतरी होती है।

कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का प्रभाव वायुमंडलीय गर्मी के अनुपात में बढ़ावा करता है, जो अवसादी शृंखला और ऊनमुक्ति के कारक होते हैं। इसके फलस्वरूप, भूमंडलीय तापमान में वृद्धि होती है, जो मौसम बदलाव के प्राकृतिक कारणों में से एक है।

भारत में पिछले एक दशक में ऑटोमोबाइल की बिक्री में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स (SIAM) के मुताबिक साल 2020-21 में 1 करोड़ 86 लाख ऑटोमोबाइल भारत में बिके थे। 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 2 करोड़ 36 लाख पर पहुंच गई है। 2011 में भारत में 1.5 करोड़ ऑटोमोबाइल बिके थे।

SIAM के मुताबिक पिछले 3 साल में यात्री वाहन की बिक्री दोगुनी हुई है, जबकि इस दौरान तीन पहिया वाहनों की बिक्री में 3 गुना की बढ़ोतरी देखी गई है। ऑटोमोबाइल उद्योग की यह बढ़ती बिक्री देश की ऑटोमोबाइल सेक्टर की मजबूती और विकास की ओर स्पष्ट संकेत देती है। यह उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और नौकरियों की सृजनता में भी मदद कर रहा है।

इसलिए, साधारण वाहनों की तुलना में ऊर्जा संवहनीय वाहनों का उपयोग करना और स्थानीय परिवहन सुविधाओं का उपयोग करना हमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की दिशा में एक कदम आगे ले जाता है।

4.एयर कंडिशनर का उपयोग बढ़ा (Warning on paryavaran)

Warning on paryavaran : गर्मी से बचने के लिए भारत में एयर कंडिशनर के प्रयोग का ट्रेंड बन गया है, जिसकी वजह से इसकी बिक्री और उपयोग में काफी बढ़ोतरी हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में साल 2010 के मुकाबले 2023 में एयर कंडिशनर की बिक्री में 3 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

Warning on paryavaran : भारत में वर्तमान में हर 100 घर में से 24 घरों में एयर कंडिशनर का प्रयोग किया जाता है। इसी रिपोर्ट में आशंका जाहिर की गई है कि 2050 तक भारत में हर 100 में से 72 घरों में एसी होगा। यह वृद्धि उपयोगकर्ताओं की आर्थिक स्थिति में सुधार और तकनीकी प्रगति का परिणाम है। एयर कंडिशनर की इस बढ़ती प्रयोगकर्ता बात को ध्यान में रखते हुए हमें पर्यावरण की ओर सतत कदम बढ़ाने की जरूरत है।

मुंबई, दिल्ली जैसे महानगरों में एसी की बिक्री सबसे ज्यादा है। IEA-50 के मुताबिक भारत में एसी की डिमांड में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी आई है। वैज्ञानिकों की मानों तो एसी अपने आसपास के तापमान में 2 डिग्री तक की बढ़ोतरी करता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि एसी की वजह से तापमान में बढ़ोतरी होने की सबसे मुख्य वजह इसके उपयोग का समय है। लोग अमूमन एसी का सबसे ज्यादा उपयोग रात में तड़के सुबह करते हैं।

Warning on paryavaran : सुबह का मौसम शांत होता है और तापमान में एसी से निकलने वाली गर्मी घुल-मिल जाती है। यह घटनाएं एक तापमान परिवर्तन प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिसमें एसी का उपयोग तापमान को बढ़ावा देता है। इसलिए, एसी की सही उपयोग तकनीक और समय का जरूरी है ताकि इसके उपयोग से होने वाली गर्मी का प्रभाव कम हो सके।

साल 1975 में टेक्सास मंथली पत्रिका ने एसी के उपयोग पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेरिका का ह्यूस्टन कैसे एसी की वजह से देश का सबसे गर्म शहर बन गया है। एसी का यह उपयोग तापमान को बढ़ावा देता है और जलवायु बदलाव को तेजी से बढ़ावा देता है।

Warning on paryavaran : वैज्ञानिकों ने एक समय में एसी का उपयोग करने की सलाह दी थी, लेकिन अब इसके बजाय पेड़ों को बढ़ावा देने की सलाह दी जा रही है। इसका मतलब है कि हमें ग्लोबल वार्मिंग जैसी महामारी से निपटने के लिए वायु प्रदूषण को कम करने की जरूरत है और साथ ही हमें तापमान को भी नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त तरीके अपनाने की आवश्यकता है। इससे हम जलवायु परिवर्तन को कम कर सकते हैं और आने वाले पीढ़ियों को स्वस्थ और सुरक्षित जीने का मार्ग दिखा सकते हैं।

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