The Holocaust : वैश्विक संघर्षों में अत्याचार और AI , क्यों चेतावनी दी गई?

The Holocaust : वैश्विक संघर्षों में अत्याचार और AI , क्यों चेतावनी दी गई?

The Holocaust: AI , झूठी होलोकॉस्ट कहानियों के फैलाव में यहूदी विरोध का संकेत?

The Holocaust : वैश्विक संघर्षों में अत्याचार और AI , क्यों चेतावनी दी गई?
The Holocaust : वैश्विक संघर्षों में अत्याचार और AI , क्यों चेतावनी दी गई?

The Holocaust: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि AI तकनीक भूल से गलत जानकारी फैला रही है। यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल ऑड्रे एजोले ने कहा कि यदि हम AI को भयानक होलोकॉस्ट के सच को कमजोर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो इससे दो बड़े खतरे हैं। पहला, यहूदी विरोध तेजी से बढ़ सकता है। दूसरा, आने वाली पीढ़ियों को सही जानकारी नहीं मिलेगी। इसलिए, हमें यूनेस्को की सिफारिशों को जल्दी से जल्दी लागू करना चाहिए ताकि AI का सही इस्तेमाल हो सके और नई पीढ़ी को सच का सही ज्ञान मिले।

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने यह चेतावनी दी है कि एगर हम ध्यान नहीं देंगे, तो AI होलोकॉस्ट की याददाश्त को मिटा सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि AI तकनीक गलती से होलोकॉस्ट के बारे में गलत जानकारी फैला रही है। यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल ने कहा है कि अगर हम ऐसा करेंगे, तो दो खतरे हैं। पहला, यहूदी विरोध बढ़ सकता है। दूसरा, आने वाली पीढ़ियों को सही जानकारी नहीं मिलेगी।

इसलिए, हमें यूनेस्को की सिफारिशों को जल्दी से लागू करना चाहिए ताकि AI का सही इस्तेमाल हो सके और नई पीढ़ी को सच का सही ज्ञान मिले।

The Holocaust:  IDC ने एक रिपोर्ट में भी यही बात कही है कि इस तकनीक का गलत इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे गलतफहमियाँ फैल सकती हैं और विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है। इसी तरह की रिपोर्टें अवगत कराती हैं कि AI के सही इस्तेमाल की जरूरत है और उसे समाज के हित में ही लागू करना चाहिए।

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कई बार खुद ही गलत चीजें बना लेता है AI

The Holocaust: यह रिपोर्ट युनेस्को और वर्ल्ड जूइश कांग्रेस द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है। इसमें चेतावनी दी गई है कि आजकल बच्चे अपने होमवर्क और ऑनलाइन जानकारी के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस संदर्भ में, यह संभव है कि उन्हें होलोकॉस्ट के बारे में गलत जानकारी मिल जाए, क्योंकि AI अक्सर गलत जानकारी देने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

इसलिए, युनेस्को और वर्ल्ड जूइश कांग्रेस का कहना है कि हमें बच्चों को सही जानकारी प्राप्त करने के लिए AI के इस्तेमाल को समझने और संयंत्रित करने की जरूरत है। इसके अलावा, समाज में AI के उपयोग को सावधानी से बढ़ावा देने की भी आवश्यकता है ताकि यह समाज के हित में हो।

Web development
Web development

The Holocaust: विवरण में कहा गया है कि 10 से 24 साल की आयुवर्ग के 80% बच्चे रोजाना AI का इस्तेमाल करते हैं, सीखने, मनोरंजन और अन्य कार्यों के लिए। इसलिए, हमें जल्दी से जल्दी एक रणनीति बनानी चाहिए ताकि यह नई तकनीक सही दिशा में चले और बच्चों को सही जानकारी मिले। साल 2022 में ही AI टूल्स जैसे कि चैटजीपीटी और DALL-E-2, बाजार में आए थे।

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कभी सोचा है कि AI कैसे सीखता है?

The Holocaust: AI को ट्रेन करने के लिए डेटा की महत्वपूर्ण अवश्यकता होती है। यह डेटा अक्सर इंटरनेट से लिया जाता है, लेकिन कभी-कभी यह गलत जानकारी भी हो सकती है। ऐसे मामलों में, AI सिस्टम पक्षपाती हो जाते हैं और गलत नतीजे दे सकते हैं। इससे सामाजिक स्थितियों और नैतिकता के मामले में संदेह बढ़ सकता है।

अत: इसे सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि AI सिस्टम्स को सही और सत्यापित डेटा से ही ट्रेन किया जाए, ताकि वे समाज के लिए सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकें। यही तरीका है जिससे हम एक सशक्त और न्यायप्रिय AI के विकास को समर्थन कर सकते हैं।

The Holocaust:  होलोकॉस्ट जैसे दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के संदर्भ में, इंटरनेट पर आमतौर पर बहुत सारी गलत जानकारियाँ होती हैं। ऐसे मामलों में, AI डेवलपर्स को ध्यान देना चाहिए क्योंकि वे सही निगरानी और सत्यापित स्रोतों का उपयोग न करके गलत जानकारी को सीख सकते हैं। यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि इससे AI सिस्टम गलत नतीजे दे सकते हैं और विशेष घटनाओं को नकारने की भूमिका निभा सकते हैं।

सामाजिक जिम्मेदारी है कि हम AI को सही और प्रमाणित जानकारी से ही सिखाएं ताकि इसका उपयोग सामाजिक सुधार और सच्चाई के लिए किया जा सके। एक संवेदनशील AI संस्करण के विकास में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।

एक उदाहरण के रूप में, एक ऐप Historical Figures App लोगों को एडोल्फ हिटलर और जोसेफ गोएबल्स जैसे नाज़ी नेताओं से बात करने की सुविधा देता था। इस ऐप में यह भी दावा किया गया था कि गोएबल्स जैसे नेता होलोकॉस्ट में शामिल नहीं थे और उन्होंने यहूदियों की मदद की थी। लेकिन यह एक झूठा दावा था। हकीकत में, गोएबल्स नेताओं में से एक थे जिन्होंने होलोकॉस्ट के अत्याचारों को प्रोत्साहित किया था। इस तरह की ऐप्स नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं और इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकती हैं।

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AI चीजों को आसान बनाने के चक्कर में इतिहास ही बदल देता है

The Holocaust: AI को जब पूरी जानकारी नहीं मिलती, तो वह अपना दिमाग लगाकर अफवाहें फैला सकता है। वे कभी-कभी इतिहास को भी बदलकर प्रस्तुत कर सकते हैं, जैसे किसी नहीं हुए किस्से बताना। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि चैटजीपीटी और गूगल का बार्ड, दोनों ही AI, ऐसे मामलों में फंस जाते हैं जहां वास्तविकता से अलग कहानियां गढ़ लेते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सही जानकारी का महत्व है और AI को सत्यापन के साथ जानकारी प्रदान की जानी चाहिए। यह हमें गलत या भ्रामक जानकारियों से बचने में मदद कर सकता है।

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एक उदाहरण के रूप में, चैटजीपीटी ने यह कहानी बना दी कि नाजियों ने यहूदियों को नदियों और झीलों में डुबोकर मार डाला, जो कभी नहीं हुआ। उसी तरह, बार्ड ने होलोकॉस्ट के जाली चश्मदीदों के झूठे बयान भी बना डाले। AI को आसान बनाने के चक्कर में पूरा इतिहास ही उल्टा-सीधा बता सकता है। वह कुछ ही सोर्स और कुछ ही घटनाओं को लेकर पूरी कहानी बना देता है। इससे स्पष्ट होता है कि सही जानकारी की महत्वपूर्णता है, और AI को सत्यापन के साथ जानकारी प्रदान की जानी चाहिए। यह हमें गलत या भ्रामक जानकारियों से बचने में मदद कर सकता है।

इस समस्या का हल क्या है? 

The Holocaust: यूनेस्को (UNESCO) के निर्मित नैतिक नियमों को जल्दी से जल्दी अपनाने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है। यूनेस्को ने ‘AI के लिए नैतिक सिफारिशें’ (Recommendation on the Ethics of AI) के रूप में दुनिया के सभी देशों के लिए कुछ नियम तैयार किए हैं। ये नियम अभी तक के इकलौते नियम हैं जो कि सभी देश मानते हैं। 2021 में, सभी देशों ने मिलकर इन नियमों को अपनाया था।

इसके अलावा, 50 से अधिक देशों ने अपने कानूनों में ये नियम शामिल कर लिए हैं। ये नियम AI विकास और उपयोग में नैतिकता और दायित्व को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके माध्यम से, विश्व समुदाय को सही और सुरक्षित AI प्रौद्योगिकी की दिशा में अग्रसर होने में मदद मिलती है।

The Holocaust:  यूनेस्को टेक कंपनियों से भी कह रहा है कि वो इन नियमों को अपनाएं. उन्हें ये भी ध्यान रखना चाहिए कि वो जो AI बना रहे हैं वो निष्पक्ष हों, उनके काम करने का तरीका साफ हो, मानवाधिकारों का सम्मान करें और हर कदम पर सावधानी बरतें. अच्छी बात ये है कि फरवरी 2024 में आठ टेक कंपनियों ने सबसे पहले यूनेस्को के डायरेक्टर जनरल के साथ एक समझौता किया था. इस समझौते में उन्होंने ये वादा किया था कि वो नए AI टूल्स को बनाते समय नैतिक तरीकों का ध्यान रखेंगी.

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होलोकॉस्ट क्या है, द्वितीय विश्व युद्ध से क्या है संबंध

The Holocaust: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोप के यहूदियों का नरसंहार होलोकॉस्ट के नाम से जाना जाता है| साल 1941 से 1945 के बीच नाजी जर्मनी और उसके साथियों ने पूरे यूरोप पर कब्जा कर लिया था| इस दौरान उन्होंने वहां रहने वाले करीब दो-तिहाई यहूदियों यानी लगभग 60 लाख लोगों को बहुत ही क्रूर तरीके से मार डाला था|

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The Holocaust:  इन बेगुनाह लोगों को ज्यादातर सरेआम गोली मारकर या जहरीली गैस देकर मारा गया| ये हत्याएं खास तौर पर पोलैंड के उन कैंपों में की गईं, जिन्हें आज हम ऑशविट्ज़-बिरकेनाऊ, ट्रेब्लिंका, बेल्जेक, सोबिबोर और चेल्मनो के नाम से जानते हैं| हालांकि, नाजियों ने सिर्फ यहूदियों को ही नहीं निशाना बनाया नाजियों ने दूसरे धर्मों के लोगों और युद्धबंदियों को भी मारा| उनकी संख्या भी कम नहीं थी, शायद यहूदियों जितनी या उससे भी ज्यादा| इन सब घटनाओं को भी कभी-कभी होलोकॉस्ट कहा जाता है|

The Holocaust:  नाजियों का मानना था कि जर्मन जाति सबसे श्रेष्ठ है और उन्हें ज्यादा जगह चाहिए| इसी ख्याल के आधार पर उन्होंने 1933 में जर्मनी में राजनीतिक ताकत हथिया ली थी| उन्होंने यहूदियों को जर्मनी से बाहर निकालने के लिए दबाव बनाना शुरू किया | इसके लिए उन्होंने कई कानून बनाए, यहूदियों का सामाजिक बहिष्कार किया और 1938 में पूरे देश में हिंसा भड़काई| 1939 में जर्मनी ने पोलैंड पर हमला कर दिया| इसके बाद जर्मन सेना और उनके मददगारों ने करीब 15 से 20 लाख यहूदियों को गोली मार दी|

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