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Rajkot Fire: राजकोट में पेट्रोल-डीजल से हुई आग, NOC के बिना चल रहा था ‘गेम जोन’…अग्निकांड का खुला ‘राज’।

Rajkot Fire: वजह लगी आग के कारण, राजकोट का ‘गेम जोन’ पूरी तरह से बर्बाद हो गया। दमकलकर्मियों ने आग को रोकने में लगाए तीन घंटे।

Rajkot Fire

Rajkot Fire: गुजरात के राजकोट में शनिवार (25 मई) को एक गेम जोन में भीषण आग लग गई, जिसमें 27 लोगों की जान गई है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। इस भीषण हादसे की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन अनुसार, टीआरपी गेम जोन नामक इस जगह पर पेट्रोल-डीजल रखा था, जिसकी वजह से आग लगने के बाद वह भड़क उठी। अब तक, बचाव कार्रवाई के दौरान, आग को काबू में लिया गया है, लेकिन इस हादसे से लोगों की बचाव और सुरक्षा की चिंता बनी हुई है। आग पर काबू पाने में लगाए गए दमकल कर्मियों की मेहनत को सलामी है, जिन्होंने जीवन खोजने की कोशिश की।

Rajkot Fire: गुजरात के राजकोट में हुई आग के घटनाक्रम की रिपोर्ट में आया है कि टीआरपी गेम जोन में रखे जनरेटर को चलाने के लिए 1500 से 2000 लीटर डीजल स्टोर किया गया था। इसी प्रकार, यहां गो कार रेसिंग के लिए भी 1000 से 1500 लीटर पेट्रोल रखा गया था। जब आग लगी, तो यह फैलते हुए पेट्रोल-डीजल के डिब्बों तक पहुंच गई, जिससे आग और भी तेजी से फैल गई।

Rajkot Fire: इस आग की भयानकता का परिणाम यह हुआ कि गेम जोन का पूरा स्ट्रक्चर जलकर राख हो गया। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के समय वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। समय बितते ही, डमकलकर्मी बहादुरी से आग को नियंत्रित करने में सफल रहे और महज तीन घंटे में आग को बुझा दिया। इस कठिन समय में डमकलकर्मियों ने अपनी जिंदगियों को खतरे में डालकर बचाव के काम में जुटने का साहस दिखाया।

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यहां की सूचना अभी तक यह बताने में सक्षम नहीं है कि आग कैसे लगी, लेकिन यह हादसा एक महत्वपूर्ण सवाल उठाता है कि सुरक्षितता के नियमों का पालन कितना जरूरी है, खासकर ऐसे स्थानों में जहां जनसंख्या अधिक होती है और भीषण दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

फायर डिपार्टमेंट के NOC बिना चल रहा था गेम जोन

Rajkot Fire: द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजकोट के डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर स्वप्निल खरे ने बताया कि टीआरपी गेम जोन ने ‘फायर नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (एनओसी) के लिए अप्लाई नहीं किया था। उन्होंने कहा, “हम गेमिंग जोन के विवरण की जांच कर रहे हैं, लेकिन पहली नजर में ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है कि ऑपरेटरों ने फायर एनओसी के लिए आवेदन किया था, न ही उन्होंने राजकोट नगर निगम से किसी अन्य मंजूरी के लिए आवेदन किया था।”

इसके अलावा, डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर ने जो बताया, उससे स्पष्ट है कि गेम जोन की सुरक्षा और मंजूरी के मामले में गंभीर संकेत मिल रहे हैं। ऐसे स्थानों पर सुरक्षा नियमों का पालन करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है ताकि दुर्घटनाएं न हों और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित रहे।

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गेम जोन के पार्टनर-मैनेजर हिरासत में

राजकोट अग्निकांड के बाद पुलिस कार्रवाई में जुट गई है। टीआरपी गेम जोन के मैनेजर नितिन जैन और इसके एक पार्टनर युवराज सिंह सोलंकी को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन्हें शनिवार रात को हिरासत में लिया गया।

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Rajkot Fire: गेम जोन के तीन पार्टनर हैं, जिनमें प्रकाश जैन, युवराज सिंह सोलंकी, और राहुल राठौड़ शामिल हैं। पुलिस अब इनसे आग लगने की वजह और यहां के दस्तावेजों को लेकर पूछताछ कर रही है।

Rajkot Fire: इस हादसे में बचाव और सुरक्षा की कमी के मामले पर भी पुलिस विशेष ध्यान दे रही है। जिस तरह की सम्भावित लापरवाही सामने आ रही है, उससे समाज में सामाजिक चिंता बढ़ी है। आग लगने की वजह और इसके नियंत्रण में की गई भूल की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

एंट्री फीस के लिए चल रही स्कीम से बढ़ी भीड़

Rajkot Fire: राजकोट के टीआरपी गेम जोन में शनिवार को एंट्री फीस 99 रुपये कर दी गई थी। इसका मकसद गर्मियों की छुट्टियां और वीकेंड के मौके पर बच्चों को आकर्षित करना था। इस वजह से गेम जोन में बहुत सारे लोग पहुंचे हुए थे।

Rajkot Fire: इसी समय एक बड़ी घटना के दौरान, जब लोग विभिन्न गेम्स में लगे थे, आग लग गई। चश्मदीदों का कहना है कि यह हादसा उस वक्त हुआ, जब बच्चों सहित कई लोग अलग-अलग गेम्स का मजा ले रहे थे। गेम जोन की एंट्री-एग्जिट के लिए 6 से 7 फीट का एक ही रास्ता था, जिसकी वजह से लोगों को बचने में मुश्किलें आईं।

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इस घटना ने लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक किया है। गेम जोन और अन्य सार्वजनिक स्थानों में सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था को लेकर सरकार को विचार करने की आवश्यकता है।

एसआईटी करेगी राजकोट अग्निकांड की जांच

Rajkot Fire:राजकोट में हुए इस भयानक हादसे के बाद सरकार भी एक्शन में आ गई है। सरकार ने घटना की जांच अपर पुलिस महानिदेशक सुभाष त्रिवेदी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपी है।आग लगने के बाद राजकोट के पुलिस आयुक्त राजू भार्गव ने मीडियाकर्मियों को बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जाएगी और शहर के सभी गेमिंग जोन को ऑपरेशन बंद करने का मैसेज जारी किया गया है।

Rajkot Fire: यह नई कार्रवाई सरकार की संवेदनशीलता और सुरक्षा के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाती है। इस घटना से समाज में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है और सरकार के कदमों से लोगों में विश्वास भी बढ़ा है।

गुजरात सरकार ने मुआवजे का किया ऐलान

Rajkot Fire:सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। इस घटना में मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा, जबकि घायलों को 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राजकोट में हुए इस हादसे पर अपनी दुख और संवेदना जताई और हताहतों के लिए मुआवजे का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस घटना में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति उनकी संवेदना है और ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के उपायों पर ध्यान देने की भी आग्रह किया।

इस मुआवजे की घोषणा ने मृतकों के परिजनों को एक सहारा दिया है और साथ ही सामाजिक जिम्मेदारी को भी दर्शाया है कि सरकार उनके साथ है और उनकी मदद के लिए तैयार है।

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राजकोट गेम जोन में लगी आग पर तीन घंटे में पाया गया काबू

Rajkot Fire: गेम जोन में शनिवार शाम करीब 4.30 बजे आग लगी थी, जिस पर काबू पाने में दमकलकर्मियों को लगभग तीन घंटे लग गए। शनिवार रात 9 बजे राजकोट कलेक्टर प्रभाव जोशी ने कहा कि हमें लगभग 4:30 बजे आग की सूचना मिली थी, तुरंत एम्बुलेंस और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची।

Rajkot Fire: गेम जोन की अस्थायी संरचना ध्वस्त हो गई है। आग पर दो घंटे पहले काबू पाया गया है। राजकोट कलेक्टर ने बताया कि वे मुख्यमंत्री के साथ संपर्क में हैं और घटना की जांच के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे में किए गए नुकसान की जांच की जाएगी और सुरक्षा के उपायों पर विचार किया जाएगा।

 

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