National Technology Day: पाकिस्तान की नजरों में पोखरण: भारत की कामयाबी का पुलिंदा,नजरें गड़ाए था पाकिस्तान तो अमेरिका करता रहा पहरेदारी |

National Technology Day

National Technology Day: नेशनल टेक्नोलॉजी डे पर भारतीय परमाणु शक्ति, 26 साल पहले की आज, देश ने संघर्षों के बाद परमाणु शक्ति हासिल की।

National Technology Day
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National Technology Day: 11 मई को National Technology Day मनाने का कारण भारतीय इतिहास में विशेष है। इस दिन, भारत ने परमाणु परीक्षण किया था, जिससे देश का स्थान वैश्विक मंच पर मजबूत हुआ। परमाणु परीक्षण का महत्व और उसके पीछे की कठिनाइयों को अच्छे से समझने के लिए फिल्म “परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण” ने इस प्रक्रिया को सामाजिक रूप से उजागर किया। इस परीक्षण में शामिल सभी योद्धाओं, अभियंताओं, वैज्ञानिकों और नेताओं को सम्मानित करना उचित है, जिन्होंने देश को इस महत्वपूर्ण क्षमता की पहचान दिलाई। इस प्रक्रिया का सर्वोच्च सम्मान भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को जाता है, जिन्होंने इस परीक्षण की व्यावसायिक और तकनीकी योजना का प्रमुख निर्देशन किया। इस परीक्षण से भारत की निर्माणात्मक और वैज्ञानिक ऊर्जा को समझने में एक महत्वपूर्ण कदम था, जो आज भी विश्व भर में मान्यता प्राप्त है।

परमाणु परीक्षण

National Technology Day: 11 मई को राजस्थान के पोखरण में हुए तीन परमाणु परीक्षणों के बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, अर्थात् National Technology Dayके रूप में मनाया जाता है। पोखरण में 11 मई 1998 को हुए परमाणु परीक्षण II को आज 26 साल पूरे हो चुके हैं। पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में खेतोलाई गांव के पास, भारत ने तीन परमाणु परीक्षण किए थे। इस परमाणु परीक्षण को ‘ऑपरेशन शक्ति’ का नाम दिया गया था। यह एक महत्वपूर्ण क्षण था जब भारत ने अपने परमाणु क्षमता को प्रकट किया और देश को अपनी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत दिया। इस दिन को मनाकर हम अपने वैज्ञानिकों, योद्धाओं, और तकनीकी टीम को याद करते हैं, जो देश के प्रगति में अपना योगदान देते हैं।

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एक के बाद एक हुए तीन विस्फोट 

National Technology Day: खेतोलाई से 5 किमी दूर फायरिंग रेंज में 26 साल पहले आज ही के दिन एक के बाद एक तीन परीक्षण हुए थे। ये विस्फोट इतना ताकतवर था कि इससे पूरा इलाका गूंज उठा था और आसमान की तरफ विस्फोट का गुबार दिख रहा था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने 13 मई को न्यूक्लियर टेस्ट किया था। यह एक महत्वपूर्ण घटना थी जो भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण रूप से दर्ज हुई। इस परीक्षण से भारत की परमाणु शक्ति की क्षमता का परिचय हुआ और देश ने अपनी सामरिक शक्ति की प्रतिष्ठा को साबित किया। इस दिन को भारतीय वैज्ञानिकों, अभियंताओं और सेना के वीरों को समर्पित करते हैं, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाकर इस महत्वपूर्ण क्षण को संभाला।

अमेरिका की पहरेदारी नहीं आई काम

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National Technology Day: परमाणु परीक्षण के बाद, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी देश धमाके वाली जगह पर गए थे। भारत ने जब दुनिया के सामने परमाणु शक्ति होने का ऐलान किया था, तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई थी। इस ऐलान से अमेरिका समेत किसी भी देश की खुफिया एजेंसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगी थी। यह घटना भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल है, जिसने देश की सामरिक शक्ति और आत्मनिर्भरता की प्रतिष्ठा को मजबूत किया। इस घटना ने भारत के स्थान को वैश्विक मंच पर मजबूत किया और दुनिया को एक नई भारत की दिशा में देखने को मजबूर किया। इसमें हमारे वैज्ञानिकों, योद्धाओं और नेताओं का अद्वितीय योगदान था, जो देश की गरिमा को बढ़ाने में समर्थ हुए।

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National Technology Day: इस परीक्षण के बाद, अमेरिका के सीआईए एजेंसी ने भी माना था कि भारत सरकार अमेरिका समेत दुनियाभर के खुफिया एजेंसियों को चकमा देने में सफल हुई थी। क्योंकि उस वक्त अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए (सीआईए) भारत पर पल-पल नजर बनाकर रखती थी। सीआईए ने भारत की कड़ी पहरेदारी करने के लिए करोड़ों खर्च करके सैटेलाइट लगाए थे। लेकिन इन सभी चुनौतियों के बावजूद भारत ने पोखरण की जमीन पर सफलतापूर्वक ऑपरेशन शक्ति को अंजाम दिया था। इस सफलता ने भारत की आत्मनिर्भरता और स्वायत्तता को मजबूत किया और विश्व को दिखाया कि भारत विकास की दिशा में अग्रसर है।

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पोखरण ही क्यों? 

National Technology Day: कई लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर सरकार ने पोखरण में ही क्यों परीक्षण किया था। दरअसल, भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसी जगह को चुनी थी, जहां पर आबादी ना हो। यही वजह है कि पोखरण को ही परमाणु परीक्षण करने के लिए चुना गया था। इससे यह सुनिश्चित होता है कि अगर कोई निर्देशिका विफल होती, तो जनता को किसी भी प्रकार का खतरा नहीं होता। वैसे भी, पोखरण क्षेत्र बहुत ही अनुप्रयुक्त होता है, क्योंकि यहां कोई आबादी नहीं है और इसलिए यहां परीक्षण करने से न केवल जनता को सुरक्षित रहती है, बल्कि यह भारतीय शासन के लिए भी एक सुरक्षित विकल्प प्रदान करता है।

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National Technology Day: पोखरण जैसलमेर से 110 किलोमीटर दूर जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर स्थित एक कस्बा है। परीक्षण के दौरान पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम समेत सभी इंजीनियर्स और वैज्ञानिकों ने सेना की यूनिफॉर्म पहनी थी और सबका नाम और कोड अलग-अलग था। इतने संघर्षों के बाद भारत 11 मई के दोपहर बाद 3.45 मिनट पर परमाणु शक्ति वाला देश बना था। इस परीक्षण ने भारत को विश्व स्तर पर एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित किया कि वह अपनी सामरिक ताकत को लेकर किसी भी स्थिति में अपनी रक्षा कर सकता है। यह परीक्षण न केवल देश के अंदर ही बल्कि विश्व भर में भारत के स्थान को भी मजबूत किया और विश्व को दिखाया कि भारत एक परमाणु शक्ति होने के नाते गर्व से ऊँचा सिर उठा सकता है।

 

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