Internet Addiction Chemicals : इंटरनेट एडिक्शन , दिमागी स्वास्थ्य पर केमिकल असर !

Internet Addiction Chemicals : इंटरनेट एडिक्शन , दिमागी स्वास्थ्य पर केमिकल असर !

Internet Addiction Chemicals: जरूरी काम के बीच इंटरनेट का खेल ,  एक नया बीमारी का परिचय |

Internet Addiction Chemicals : इंटरनेट एडिक्शन , दिमागी स्वास्थ्य पर केमिकल असर !
Internet Addiction Chemicals : इंटरनेट एडिक्शन , दिमागी स्वास्थ्य पर केमिकल असर !

Internet Addiction Chemicals: आजकल की दौड़भाग जिंदगी में, काम से फुर्सत मिलते ही लोग अपने स्मार्टफोन में वीडियो, रील्स, या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर वीडियो देखना शुरू कर देते हैं। कई लोगों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल सुकून के पल होते हैं, लेकिन सोशल मीडिया के चक्कर में आपका समय निकल जाता है, और आपको पता भी नहीं चलता है।

Internet Addiction Chemicals:  यह एक गंभीर समस्या है, जिसे हम ‘इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर’ यानी आईडी कहते हैं। इससे हमारे जीवन का संतुलन ख़तरे में पड़ जाता है, क्योंकि हम जरूरी कामों को छोड़कर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर विशेष ध्यान देने लगते हैं। इससे हमें न केवल दिनचर्या की समस्याएं होती हैं, बल्कि हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है।

Internet Addiction Chemicals: वर्धमान निवासी डॉक्टर रीना दत्ता, जो एक साइकोलॉजिस्ट हैं, के अनुसार, पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया और ऑनलाइन मनोरंजन का तेजी से प्रसार हुआ है। बच्चे, युवा, बूढ़े, महिलाएं, हर उम्र के लोग डिजिटल एक्टिक्शन के शिकार हो रहे हैं। डिजिटल एक्टिक्शन या इंटरनेट की लत इतनी गहराई तक गई है कि लोग खाना खाते, बाथरूम, टॉयलेट, मीटिंग में भी मोबाइल को साथ रखते हैं।

Internet Addiction Chemicals:  हर वक्त लोग मोबाइल पर अपना ध्यान बिजी रखते हैं। इस तरह की दिनचर्या से हमारी सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे न केवल शारीरिक सेहत, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में समय-समय पर आत्म-निरीक्षण करना जरूरी है ताकि हम डिजिटल स्वास्थ्य को बनाए रख सकें।

Internet Addiction Chemicals: यह आपने ध्यान दिया होगा कि लोग टीवी पर कोई फिल्म या लैपटॉप पर फिल्म या काम कर रहे हैं लेकिन साइड में वह फोन पर रिल्स भी देख रहे होते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, कई सोशल प्लेटफॉर्म पर तरह-तरह के वीडियो देख रहे हैं। लैपटॉप पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान मोबाइल पर गेम खेलना आदि। यह सबकुछ करते समय उन्हें यह बिल्कुल भी पता नहीं होता कि ऐसा करके वे इंटरनेट की लत का शिकार हो रहे हैं और धीरे-धीरे बीमार हो रहे हैं। यह बात बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हमारी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और हमें अपने डिजिटल उपयोग पर नियंत्रण बनाए रखना चाहिए।

Internet Addiction Chemicals : इंटरनेट एडिक्शन , दिमागी स्वास्थ्य पर केमिकल असर !
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क्या है ‘इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर’

‘इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर’ (आईडी) को बोलचाल की भाषा में कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति अपना ज्यादा से ज्यादा समय इंटरनेट पर बिताता है, तो उसे इंटरनेट की लत लग जाती है। आजकल इंटरनेट की लत इतनी बढ़ गई है कि लोगों को अक्सर होश नहीं रहता कि उनके चारों ओर क्या हो रहा है। इसके कारण रिश्तों, काम, और स्वास्थ्य पर भी इसके गंभीर नुकसान होते हैं, जैसे कि लंबे समय तक बैठकर इंटरनेट पर समय बर्बाद करना, निदान दूर करना, या अवसाद का सामना करना।

इसीलिए, हमें इंटरनेट की लत से बचने के लिए अपने समय का सही इस्तेमाल करना चाहिए। अगर हम नियंत्रित नहीं रहे, तो हमारे लिए और हमारे परिवार के लिए यह खतरनाक हो सकता है। इसलिए, सावधानी बरतनी चाहिए और सही बातों में समय बिताना चाहिए।

इंटरनेट और सोशल मीडिया

इंटरनेट और सोशल मीडिया के युग में लोग अक्सर अपने काम से ही व्यस्त रहते हैं, लेकिन इस एडिक्शन की वजह से वे अपने परिवार को ध्यान नहीं दे पाते हैं। इंटरनेट की लत एक बीमारी है जिसका इलाज न किया जाए तो यह गंभीर समस्या बन सकती है। अगर किसी व्यक्ति को इस बीमारी का संकेत मिलता है तो उसे थेरेपी या काउंसलिंग का सहारा लेना चाहिए। इससे उसे सही राह पर ले जाया जा सकता है और उसकी सेहत में सुधार हो सकता है। इसलिए, हमें इंटरनेट की लत से बचने के लिए अपने समय का सही इस्तेमाल करना चाहिए और परिवार के साथ समय बिताने का ध्यान रखना चाहिए।

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Internet Addiction Chemicals : इंटरनेट एडिक्शन , दिमागी स्वास्थ्य पर केमिकल असर !
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इंटरनेट के कारण हेल्थ और रिश्ते भी होते हैं प्रभावित

इंटरनेट की लत लगने का अर्थ है कि व्यक्ति का ज्यादा से ज्यादा वक्त इंटरनेट पर बीत रहा है। वह समझ रहा है कि यह सेहत के लिए ठीक नहीं है लेकिन तब भी उससे दूरी नहीं बना पा रहा है। अगर किसी व्यक्ति के पास कोई काम नहीं है या ऐसा कोई व्यक्ति है जिसका सोशल मीडिया काम करता है, तो ऐसे व्यक्ति को भी इंटरनेट पर अपना ज्यादा वक्त बिताने को मजबूर होते हैं। इंटरनेट पर हद से ज्यादा वक्त बिताने के कारण रिश्तों, काम के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी काफी बुरा असर पड़ता है। व्यक्ति इंटरनेट का उपयोग करने पर निर्भर हो जाता है और उसे लगता है कि यह करके ही उसे शांति मिलती है, जिसके कारण वह अधिक से अधिक समय इंटरनेट पर बिताता है।

इंटरनेट की लत शरीर के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता है। सबसे हैरानी की बात होती है कि जो लोग इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी सोच भी काफी ज्यादा प्रभावित होती है। कई बार तो देखा गया है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोग ज्यादा टॉक्सिक हो जाते हैं। ज्यादा इंटरनेट के इस्तेमाल के कारण स्मार्टफोन स्क्रीन पर लगातार देखने के कारण आंखें खराब होने लगती हैं। हाल ही में हुए रिसर्च के मुताबिक इंटरनेट की लत के कारण दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है, और इसका दिमाग के सेल्स पर भी गहरा असर पड़ता है।

इंटरनेट की लत शरीर के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता है। सबसे हैरानी की बात होती है कि जो लोग इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनकी सोच भी काफी ज्यादा प्रभावित होती है। ज्यादा इंटरनेट के इस्तेमाल के कारण स्मार्टफोन स्क्रीन पर लगातार देखने के कारण आंखें खराब होने लगती हैं। हाल ही में हुए रिसर्च के मुताबिक इंटरनेट की लत के कारण दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ता है, और इसका दिमाग के सेल्स पर भी गहरा असर पड़ता है।

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द गार्डियन की रिपोर्ट

इंटरनेट के अधिक उपयोग से नींद की कमी हो सकती है, जिससे शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भोजन की आदत और मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका बहुत बड़ा प्रभाव होता है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं पर इंटरनेट का अधिक उपयोग गंभीर रूप से प्रभाव डालता है।

‘पीएलओएस मेंटल हेल्थ’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट का अधिक उपयोग न्यूरल नेटवर्क को अधिक प्रभावित कर सकता है। इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य यह था कि कैसे इंटरनेट नौजवानों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। इसके परिणामस्वरूप, उनके व्यवहार में भी परिवर्तन आता है जोकि गंभीर प्रभाव डालता है।

यह रिसर्च 2013 से 2023 के बीच की गई थी और इसमें पिछले 12 साल के डेटा को इकट्ठा किया गया था। इसमें 10 से 19 साल की आयु वर्ग के लोगों का समावेश था। इस रिसर्च में 237 नौजवानों को शामिल किया गया था जिन्हें इंटरनेट की लत का अध्ययन किया गया था। इसके माध्यम से, इंटरनेट की लत के कारण नौजवानों के दिमाग में कौन-कौन से क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं, इसे जानने की कोशिश की गई।

इस रिसर्च में फंक्शनल मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (fMRI) का उपयोग किया गया था। इसके माध्यम से, वैज्ञानिकों ने इंटरनेट की लत के प्रभाव को समझने के लिए नौजवानों के दिमाग के किसी विशेष हिस्से का अध्ययन किया। इससे पता चला कि इंटरनेट की लत नौजवानों के दिमाग की समाज में सकारात्मक प्रभावित करने की क्षमता को कम कर देती है।

स्टडी में हुआ ये खुलासा

इस स्टडी में खुलासा किया गया कि जो व्यक्ति इंटरनेट और सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, ऐसे व्यक्ति की सो जाने के बाद भी उनके दिमाग में हलचल मची रहती है। इसका मतलब है कि उनके दिमाग का वह हिस्सा, जो सोचने, याद रखने, और फैसले करने के लिए काम करता है, वहां हलचल मची रहती है और उसमें कम तालमेल होती है। इससे समझने में मदद मिलती है कि इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग करने वाले व्यक्ति के दिमाग में कैसे बदलाव आ सकता है।

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स्टडी के मुताबिक दिमाग पर होता है गहरा असर

इंटरनेट की लत के कारण नौजवानों की दिमागी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इससे सिर्फ सीखने की शक्ति पर ही नहीं, बल्कि उनके शरीर के बैलेंस पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इंटरनेट के उपयोग से उनके दिमाग में छूट आ जाती है और उनके केमिकल्स बिल्कुल अधिक प्रभावित हो जाते हैं, जिससे वे अपने रोजमर्रा के काम-काज, खानपान, और सोने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी दिनचर्या बिगड़ जाती है और उन्हें निरंतर चिंता और दबाव का सामना करना पड़ता है। इसलिए, इंटरनेट का मात्र उपयोग करना ही नहीं, बल्कि सही सीमा में रहकर उसे सभी अवसरों पर सही ढंग से उपयोग करना चाहिए।

निष्कर्ष

‘लीड ऑथर और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन’ के ग्रेट ऑरमंड स्ट्रीट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ’ के नाम से ब्रिटेन में हुए एक स्टडी के मुताबिक पढ़े लिखे माता-पिता पूरी कोशिश करते हैं कि बच्चों का स्क्रीन टाइम बिल्कुल कम हो। इंटरनेट की लत से दूर रहें। वे इस मुद्दे पर बच्चों से खुलकर बात करते हैं ताकि उन्हें इसके साइडइफेक्ट्स से बचाया जा सके।

 

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