BJP failure in Ayodhya: अयोध्या में BJP के हारने की 8 बड़ी वजहें जानिए 8 वजह, क्या राम मंदिर निर्माण का मिला फायदा?

BJP failure in Ayodhya

BJP failure in Ayodhya: अयोध्या में सपा ने जीत का परचम लहराया है और बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के इतने बड़े आयोजन के बावजूद बीजेपी यहां से जीत नहीं सकी है।

BJP failure in Ayodhya
अयोध्या में BJP के हारने की क्या वजह है? जानिए 8 वजह, क्या राम मंदिर निर्माण का मिला फायदा?- BJP failure in Ayodhya

BJP failure in Ayodhya: अयोध्या में समाजवादी पार्टी (सपा) ने शानदार जीत दर्ज की है, जिससे बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। यह जीत इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बड़े आयोजन के बावजूद बीजेपी जनता का समर्थन जुटाने में विफल रही। BJP failure in Ayodhya इस बात को स्पष्ट करता है कि भाजपा (BJP) की रणनीति और प्रचार अभियान जनता को प्रभावित करने में असफल रहे। सपा की जीत ने यह दिखा दिया कि अयोध्या के मतदाताओं ने विकास और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी, जबकि बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे पर ही फोकस्ड रही।

BJP failure in Ayodhya: राम मंदिर निर्माण को बीजेपी ने अपने प्रमुख चुनावी एजेंडे के रूप में प्रस्तुत किया था और उम्मीद की थी कि इससे उन्हें व्यापक जनसमर्थन मिलेगा। लेकिन जनता ने इस बार विकास, रोजगार और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी। सपा ने इन मुद्दों को भुनाने में कामयाबी हासिल की और जनता का विश्वास जीतने में सफल रही।

BJP failure in Ayodhya: सपा की इस जीत में उनके स्थानीय नेतृत्व की मजबूत रणनीति और जमीनी स्तर पर की गई मेहनत का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने जनता की समस्याओं को समझा और उन्हें समाधान का भरोसा दिलाया। वहीं, बीजेपी के आंतरिक विवाद और नेतृत्व की कमी ने भी उनके हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

BJP failure in Ayodhya: अयोध्या की जनता ने साफ संदेश दिया है कि धार्मिक मुद्दों से अधिक महत्वपूर्ण हैं विकास और बुनियादी सुविधाएं। सपा की जीत और बीजेपी की हार यह साबित करती है कि जनता का मूड बदल रहा है और वे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं।

लोकसभा चुनावों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। यूपी में बीजेपी को करारा झटका लगा है। 80 सीटों में सपा को 37, बीजेपी को 33, कांग्रेस को 6, आरएलडी को 2, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) को एक और अपना दल (सोनेलाल) को एक सीट मिली है।

अयोध्या में समाजवादी पार्टी जीती

यूपी के अयोध्या में ज़्यादा चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद को 54,567 वोट से जीत मिली है और उन्हें कुल 5,54,289 वोट मिले हैं। बीजेपी उम्मीदवार लल्लू सिंह को 4,99,722 वोट मिले हैं। तीसरे स्थान पर बसपा के सच्चिदानंद पांडे रहे, जिन्हें 46,407 वोट मिले हैं। यह परिणाम BJP failure in Ayodhya को दर्शाता है। समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद की जीत ने साबित कर दिया कि जनता का विश्वास उनकी ओर था, जबकि बीजेपी की रणनीतियां विफल रहीं। यही कारण बना BJP failure in Ayodhya का, जो चुनाव परिणामों में साफ दिखाई दिया।

नहीं मिला फायदा राम मंदिर निर्माण का

भाजपा (BJP) ने राम मंदिर के मुद्दे पर इस लोकसभा चुनाव में देश भर में बहुत बड़ा माहौल बनाया था और उसे उम्मीद थी कि इसका फायदा उसे 2024 के लोकसभा चुनाव में मिलेगा, लेकिन भाजपा (BJP) की यह रणनीति कोई काम की नहीं रही और अयोध्या में उसे उल्टा परिणाम देखने को मिला।

BJP failure in Ayodhya का एक प्रमुख कारण यह है कि जनता के बीच यह भी चर्चा है कि जिस अयोध्या में भाजपा (BJP) ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का इतना बड़ा आयोजन किया और इस कार्यक्रम को दुनिया भर में हाईलाइट किया, वहाँ से वह हार गई।

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अयोध्या में पीएम मोदी खुद गए थे और साथ ही सीएम योगी ने भी कई दौरे किए थे। देश भर की बड़ी-बड़ी हस्तियों को भी वहाँ बुलाया गया था, फिर भी भाजपा (BJP) यहाँ से जीत नहीं हासिल कर पाई। इस हार के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि भाजपा (BJP) की रणनीति अयोध्या में पूरी तरह से विफल रही, जिससे BJP failure in Ayodhya की स्थिति उत्पन्न हुई।

दैनिक प्रिंट न्यूज़”(Daily Print News) के अनुसार यह आकलन किया गया है कि बीजेपी (BJP) को अयोध्या हारने में ये महत्वपूर्ण 8 कारण हैं, जो एक बड़ा “डेली प्रिंट न्यूज़”(Daily Print News)  की ब्रेकिंग न्यूज़ (Breaking News) है।

अयोध्या में क्यों हारी भाजपा (BJP) (BJP) ?

1. जातिगत समीकरण:-

अगर हम बात करें जातिगत समीकरण पर तो सबसे बड़ी बात है कि अयोध्या में पासी बिरादरी की बहुत ही बड़ी संख्या है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी ने अपने विवेक का इस्तेमाल करके एक ऐसा कार्य किया कि भाजपा (BJP) को सीधा पटखानी दे दी। समाजवादी पार्टी ने पासी चेहरे अवधेश प्रसाद को अयोध्या में अपना उम्मीदवार बनाया। जो यूपी की राजनीति में अवधेश प्रसाद दलितों का बहुत बड़ा चेहरा है जिसमें उनकी छवि एक जमीनी नेता की तरह है। समाजवादी पार्टी को अयोध्या में दलितों का खूब वोट मिला और बहुत ही अच्छे (54567) वोट से जीत दर्ज की।

2. अवधेश की लोकप्रियता:-

BJP failure in Ayodhya के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण थे। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अवधेश प्रसाद की अयोध्या की जनता पर बहुत अच्छा विश्वास था। इस बात का भी आप अंदाजा इस प्रकार लगा सकते हैं कि वह 9 बार के विधायक भी रह चुके हैं, साथ ही मंत्री भी रहे हैं। इसके अलावा, वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उनकी मजबूत पकड़ और जनता में अच्छी छवि ने समाजवादी पार्टी को अयोध्या में एक बड़ी जीत दिलाई, जो BJP failure in Ayodhya का एक प्रमुख कारण बना।

3. संविधान पर बयान पड़ा भारी:-

BJP failure in Ayodhya के पीछे कई कारण रहे हैं। अयोध्या से बीजेपी उम्मीदवार लालू सिंह का संविधान को लेकर जो वक्तव्य किया गया था, वह बहुत भारी पड़ा। आपको बता दूं कि लालू सिंह वही नेता हैं, जिन्होंने कहा था कि मोदी सरकार को 400 सीटें इसलिए चाहिए क्योंकि संविधान बदलना है। उनके इस वक्तव्य का खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ा। इस बयान के कारण जनता में काफी नाराजगी फैली, जिससे वोटर बीजेपी के खिलाफ हो गए और इसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। यही एक बड़ी वजह बनी BJP failure in Ayodhya की।

4. लल्लू सिंह से नाराजगी:-

BJP failure in Ayodhya के पीछे कई कारण रहे हैं। लालू सिंह अयोध्या से दो बार सांसद रहे हैं। बीजेपी ने उन्हें तीसरी बार उम्मीदवार बनाया था, जबकि अयोध्या की जनता के बीच लालू को काफी नाराजगी का सामना करना पड़ा था। इसका कारण यह था कि अयोध्या के आस-पास के इलाकों में कोई भी विकास के कार्य नहीं हुए, सिर्फ राम मंदिर पर फोकस्ड होने की वजह से जनता के मुद्दे पीछे छूट गए। इससे लालू को कम वोट मिले। यही नाराजगी BJP failure in Ayodhya में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

5. राम मंदिर निर्माण के लिए घर और दुकान तोड़े गए:

BJP failure in Ayodhya के पीछे कई कारण रहे हैं। अयोध्या में 14 किलोमीटर लंबा राम पथ बनाया गया है और इसके साथ-साथ कई और भी डेवलपमेंट की गई हैं, जिसमें भक्ति पथ और राम जन्मभूमि पथ भी शामिल हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं के दौरान जिन घरों और दुकानों को तोड़ा गया, उन्हें मुआवजा सभी को नहीं मिला।

उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति की 200 साल पुरानी कोई दुकान थी, लेकिन उनके पास कागज़ नहीं थे और उनका रोज़ी-रोटी उसी दुकान से चल रही थी। उनकी दुकान तोड़ी गई, लेकिन उसे कोई मुआवजा नहीं मिला। मुआवजा सिर्फ उन्हें मिला जिनके पास कागज़ थे। इस वजह से लोगों के बीच नाराजगी थी, जिसे उन्होंने वोट नहीं देकर जाहिर किया। इस नाराजगी ने भी BJP failure in Ayodhya में अहम भूमिका निभाई।

6. आरक्षण पर मैसेज पड़ा भारी:

BJP failure in Ayodhya के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। अयोध्या में बीजेपी को सबसे बड़ा नुकसान होने की वजह उनके नेताओं की व्याख्या और प्रोपेगेंडा भी रही। जनता के बीच यह अफवाह फैली कि सरकार आरक्षण को खत्म कर देगी और संविधान को बदल देगी। इस अफवाह के चलते वोटरों का एक बड़ा तबका समाजवादी पार्टी की ओर चला गया, जिसके कारण बीजेपी को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। इसके अतिरिक्त, विकास कार्यों की कमी और युवाओं में नाराजगी भी BJP failure in Ayodhya के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

युवाओं में गुस्सा:

अयोध्या में बीजेपी की हार के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे हैं। सबसे प्रमुख कारणों में से एक यह है कि “बीजेपी को लेकर युवा वर्ग में भी बहुत ज़्यादा नाराज़गी दिखाई दे रही है, जो युवा के लिए अग्निवीर स्कीम को लेकर सरकार से सहमत नहीं दिख रहे हैं। साथ ही बेरोजगारी और पेपर लीक भी युवाओं के ग़ुस्से की अहम वजह रही है। इस वजह से युवाओं का वोट भी अयोध्या में बीजेपी के खिलाफ गया है, जो सभी कारणों में से सबसे बड़ा बाज़ह का अनुमान लगाया जा रहा है।” इसके अतिरिक्त, जातिगत समीकरण, विकास कार्यों की कमी, मुआवजे का मुद्दा और नेताओं की बयानबाजी भी BJP failure in Ayodhya के पीछे प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

कांग्रेस के लिए दलितों में सॉफ्ट कॉर्नर:-

जहां अयोध्या के दलितों में बीजेपी को लेकर नाराजगी थी, वहीं कांग्रेस के लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर भी था। जिसका असर चुनावों में देखने को मिला।

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