Bihar student struggles : बिहारी छात्रों के भविष्य में नौकरशाही और राजनीति, एक विश्लेषण |

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Bihar student struggles: नौकरशाही और राजनीति, ये दोनों ही क्षेत्र बिहारी छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं, परन्तु ये दोनों दिशाएं भिन्न-भिन्न प्रकार के भविष्य को रोशनी में लेती हैं।

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Bihar student struggles: नौकरशाही क्षेत्र में आने वाले विकास के संकेत मिल रहे हैं, खासकर विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों के उदय से। इसमें बिहारी छात्रों के लिए संभावनाएं बढ़ रही हैं। डिजिटल सेवाओं, तकनीकी ज्ञान और कौशल में अग्रणी बनने के लिए उन्हें तैयार किया जा सकता है। ऐसे माहौल में, नौकरशाही क्षेत्र बिहार के युवाओं के लिए बेहद आकर्षक हो सकता है।

Bihar student struggles: राजनीति क्षेत्र में भी बिहारी छात्रों के लिए अवसर हैं, परन्तु इसके साथ ही यह चुनौतियों से भरपूर है। राजनीति में सफल होने के लिए विद्यार्थी को न केवल शिक्षा की अच्छी जानकारी होनी चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक संज्ञान, नेतृत्व कौशल, और निर्णायकता भी विकसित करनी होगी। बिहारी छात्रों के लिए राजनीति क्षेत्र जिम्मेदारी और समझदारी के साथ सेवा करने का मंच भी हो सकता है।

सारांशतः, नौकरशाही और राजनीति दोनों ही बिहारी छात्रों के लिए अहम हैं। नौकरशाही क्षेत्र में तकनीकी उन्नति और राजनीति क्षेत्र में सामाजिक बदलाव और नेतृत्व अवसर बिहार के युवाओं के लिए संभव हैं। यहां उनकी सोच और कौशलों की विकास पर भी बातचीत होनी चाहिए ताकि वे अपने भविष्य को सही दिशा में ले सकें।

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बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हो रही बदहाली पर विचार करने की जरूरत है, क्योंकि यह समस्या बहुत सारे संकेतों के माध्यम से जताती है कि बच्चों का भविष्य कितना अनिश्चित हो सकता है। शिक्षा में गुणवत्ता की कमी, व्यावसायिक शिक्षा की कमी, अदालती लिखित परीक्षा में शोध की जरुरत का न आदान-प्रदान, और शिक्षा प्रणाली के विकास में संकोच इस दिशा में बिहार के उज्जवल भविष्य की राह में आधा हट रहे हैं।

Bihar student struggles: इसमें से एक सीधा असर यह होता है कि प्रतिभाशाली बच्चे अच्छी शिक्षा के लिए बाहर जा रहे हैं। उनके पैरेंट्स नौकरी छोड़कर अच्छी शिक्षा के लिए शहरों में घर लगा रहे हैं। यह स्थिति भी दिखा रही है कि उन्हें बिहार में अच्छी शिक्षा की उम्मीद नहीं है।

Bihar student struggles: इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था को क्षति हो रही है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को भी असर पड़ रहा है। युवा-युवतियों को नई रोशनी की तलाश में अपने राज्य से बाहर जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी सोचने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

समाज को इस समस्या को सामने देखकर उसका समाधान करने की जरुरत है। शिक्षा प्रणाली में सुधार करना, शिक्षा का स्तर ऊंचा करना, और युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना हमारे राज्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

बिहार की स्थिति क्या है?

Bihar student struggles: बिहार एक ऐसा राज्य है जहाँ अधिकांश छात्र-छात्राएं सरकारी कॉलेजों में ही पढ़ाई करना चाहते हैं। यहाँ के 545 सरकारी कॉलेजों में से 76 प्रतिशत छात्र-छात्राएं ही अपना दाखिला लेते हैं, जबकि देश भर में यह आंकड़ा 65 प्रतिशत के आसपास है, जिन्हें निजी कॉलेजों में भर्ती किया जाता है।

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Bihar student struggles: सरकारी कॉलेजों में यहाँ की राष्ट्रीय स्तर पर दाखिले की औसत गिनती केवल 709 है, जो बिहार की सबसे अधिक है। देश भर में केवल दिल्ली में ही ऐसी स्थिति है कि प्रति एक लाख आबादी पर सिर्फ आठ ही कॉलेज हों। इसके खिलाफ, बिहार में यह आंकड़ा उन्हें सराहनीय रूप में ऊंचाई प्रदान करता है।

Bihar student struggles: बिहार में यह स्थिति उन छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण होती है जो अच्छी शिक्षा की तलाश में हैं। सरकारी कॉलेजों में जगहों की कमी बनी रहती है, जिससे अधिकांश छात्र-छात्राएं इस तकनीकी क्षेत्र में प्रवेश पाने में असमर्थ रहते हैं। इससे छात्र-छात्राएं नजरिया बदलकर निजी कॉलेजों की ओर बढ़ रहे हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में एक विकल्प के रूप में प्राथमिकता देते हैं।

Bihar student struggles: उच्च शिक्षा के प्रति लोगों की रुचि को अँकलन करने के लिए ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो का उपयोग किया जाता है। इसी पर बिहार में यह अनुमान केवल 17.1 प्रतिशत है, जो उच्च शिक्षा में सम्मिलित होने की भागीदारी को दर्शाता है। विशेष रूप से, स्त्रियों की उच्च शिक्षा में भागीदारी कम है, जो एक विचारनीय समस्या है।

Bihar student struggles: बिहार में स्त्रियों की उच्च शिक्षा में भागीदारी कम होने की नकारात्मक प्रकृति विशेष ध्यानाकर्षित करती है। यहाँ तक कि नीतीश कुमार ने साइकिल चलाकर अपने व्यक्तिगत प्रयासों को प्रमोट किया, लेकिन इसके बावजूद बिहार में अभी भी बहुत सारी लड़कियां उच्च शिक्षा को देखने का मौका नहीं पा रही हैं।

इस विकास में बिहार का शिक्षक-छात्र अनुपात भी बहुत आलोचनीय है। जबकि देश भर में शिक्षकों और छात्रों का अनुपात 23 है, बिहार में यह अनुपात तीन गुना अधिक है, जो कि 64 है। ये आंकड़े भी थोड़े पुराने हैं जबकि आईएसएचसी 2022 से लिए गए हैं, जो बिहार की शिक्षा संवर्ग में आईएसएचई की स्थिति को दर्शाते हैं।

Bihar student struggles: कॉलेजों में प्रोफेसरों की कमी एक चिंताजनक समस्या है जो शिक्षा संस्थानों के विकास में बाधक बन सकती है। अधिकांश विश्वविद्यालयों में यह समस्या गहराई से दिखाई देती है, कहीं-कहीं पदों की खाली होने का अनुमान लगाया जाता है। वास्तविकता में, कई कॉलेजों में शिक्षकों की भरपूरता नहीं होती, जो कि शिक्षा के अवसरों में कटौती का कारण बन सकता है।

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एक बैठक में, कुलपतियों से इस मुद्दे पर चर्चा की गई और इसमें यह खुलासा किया गया कि जिन विषयों में प्रोफेसरों की कमी है, उनकी पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के माध्यम से होती है। यह एक चिंताजनक चिह्न है कि शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की भरपूरता को लेकर कठिनाईयों का सामना किया जा रहा है।

Bihar student struggles: मुंगेर विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षकों का कोई पद नहीं है, जबकि बीएन मंडल मधेपुरा में 14 विषयों में से 11 में कोई शिक्षक नहीं हैं। इसके अलावा, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में 117 पद रिक्त हैं और यहाँ 381 अतिथि शिक्षक होते हैं। बीआरए विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में 1690 पदों में से 637 शिक्षक होते हैं, जबकि 501 अतिथि शिक्षक हैं।

Bihar student struggles: इस तरह के आंकड़ों से पता चलता है कि शिक्षकों की कमी बिहार के विभिन्न शिक्षा संस्थानों में समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं। यह एक गंभीर समस्या है जो शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है। इससे न केवल शिक्षा संस्थानों के विकास में बाधकताओं का सामना करना पड़ेगा, बल्कि छात्रों की शिक्षा में भी कठिनाइयाँ आ सकती हैं।

उच्च शिक्षा में सुधार की पहल :

Bihar student struggles: उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए राज्यपाल ने दशकों से कुछ गंभीर प्रयास किए हैं। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत राज्य में 4 वर्षीय स्नातक कोर्स को लागू किया गया और इसी दौरान नए पाठ्यक्रमों की तैयारी की गई। पहले बंद हो चुकी विश्वविद्यालयों की सीनेट बैठकें फिर से शुरू कर दी गईं और राज्यपाल ने सीनेट की सभी बैठकों में स्वयं भागीदारी शुरू की।

Bihar student struggles: इस प्रयास की सराहना करते हुए विधानमंडल ने अभिनन्दन प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके अलावा, भारतीय ज्ञान परंपरा एक नया विषय बनाया गया और इसे नेट (यूजीसी) की परीक्षाओं में शामिल किया गया। इससे विभिन्न विषयों पर सेमिनार आदि का आयोजन होना शुरू हुआ।

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Bihar student struggles: इस प्रक्रिया से न केवल प्रोफेसरों के लिए बल्कि छात्र-छात्राओं और विश्वविद्यालयीय कर्मचारियों के लिए भी एक नया और सकारात्मक वातावरण बना है। इससे उनके बीच विश्वास का संचार हुआ है और उन्हें अपने कार्य में नयी ऊर्जा मिली है। राज्यपाल के इन प्रयासों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

शिक्षा विभाग का रवैया :

Bihar student struggles: बिहार के राजनीतिज्ञों की दुर्दशा और स्पष्टता को देखते हुए साफ है कि वहाँ कुछ बिगड़ गया है। एक समय तक चंद्रशेखर यादव शिक्षा मंत्री बने रहे, लेकिन आजकल के शिक्षा मंत्री खुद मान चुके हैं कि उनके कार्यालय में दुर्भाग्यपूर्ण लापरवाही हो रही थी। वे कार्यालय में समय-समय पर नहीं आते थे, जिससे कार्य की सख्ती से बात होती थी।

Bihar student struggles: राज्य शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के पाठक ने 4 वर्षीय स्नातक कोर्स का विरोध किया था, जिसे राजभवन ने मंजूरी दी। यह विवाद सिर उठते ही बड़ी स्तर पर चर्चा का विषय बना। इसके अलावा, शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों के बैंक अकाउंट फ्रीज किए और शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है।

Bihar student struggles: इन घटनाओं से बिहार के शिक्षा क्षेत्र में चिंताजनक अवस्था उभरकर सामने आई है। राजनीतिक दलों के अंतर्निहित विवादों से शिक्षा संस्थानों के विकास में बाधाएं आई हैं। इसे सुलझाने के लिए सही दिशा में कठिन कदम उठाने की जरूरत है ताकि बिहार के शिक्षा क्षेत्र में सुधार हो सके।

Bihar student struggles: पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के पश्चात्, कुलपतियों तक का वेतन रोकने का आदेश जारी किया गया था, जो बाद में तुगलकी फैसले के रूप में जाना गया। अदालत ने बैठकें करके इस मुद्दे को सुलझाने का आदेश दिया, लेकिन इसके परिणामस्वरूप, शैक्षणिक और अन्य विश्वविद्यालयीय गतिविधियां दो महीने से अधिक समय तक बुरी तरह प्रभावित हुईं। राजभवन ने इस पर अदालती मामलों, वार्षिक बजट, परीक्षाओं की स्थिति, विश्वविद्यालयों के पास उपलब्ध संसाधनों, आदि पर तीन बैठकें आयोजित की। इन बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा की गई थी।

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Bihar student struggles: तीनों बैठकों के बाद अपर मुख्य सचिव (के के पाठक) नदारद रहे। इससे यह पता चलता है कि नौकरशाही कितना सुनती है और राजनीतिक नेतृत्व कितना समझता है। विधानसभा में मुख्यमंत्री शिक्षा के कुछ घोषणाएं करते हैं, लेकिन शिक्षा विभाग उनका पालन नहीं करता है। बिहार में बीते 4 महीने में चार शिक्षा मंत्री बदले गए हैं, लेकिन के के पाठक अंगद के पांव की तरह जमे हुए हैं। यह जानना मुश्किल है कि उन्हें किसका समर्थन मिला है।

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मुद्दे पर नहीं, नजारे पर जोर

Bihar student struggles: शिक्षक संगठन निरंतर अकादमिक कैलेंडर को सुधारने, परीक्षाओं को समय पर करवाने जैसी मांगें उठा रहे हैं। यह सुधारों के प्रयासों को बार-बार रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा उन छात्र-छात्राओं को झेलना पड़ रहा है जो आर्थिक-सामाजिक कारणों से बिहार के बाहर शिक्षा लेने में सक्षम नहीं हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने यह भी कहा है कि जो मुद्दे उभरते हैं, उन्हें बातचीत से सुलझाया जाएगा और छात्र-छात्राओं का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। मगर वास्तविकता में हालात कुछ और हैं।

Bihar student struggles: शिक्षा संगठन के माध्यम से यह मांग की गई है कि परीक्षाएं समय पर हों ताकि छात्रों का कोई नुकसान न हो। बार-बार आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं के कारण छात्र-छात्राओं को बहुत परेशानी हो रही है, खासकर जिन्हें शिक्षा लेने के लिए अन्य राज्यों या क्षेत्रों में जाना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।

इस संदर्भ में, शिक्षा मंत्रालय को छात्रों की समस्याओं को समझने और समय-समय पर उपयुक्त कदम उठाने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि छात्रों को सही दिशा में ले जाया जा सके।

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Bihar student struggles: 9 फरवरी को शिक्षा विभाग ने उप-कुलपतियों की बैठक बुलाई थी, लेकिन उसमें उप-कुलपति नहीं आए थे। इसी तरह की बैठक में के.के. पाठक ने शिरकत नहीं की। पाठक अपने अद्भुत और अड़ियल रवैये के कारण बिहार में सुर्खियों में रहते हैं। यद्यपि, उनके अनुयायी भी हैं जो मानते हैं कि उनकी कठोरता के कारण ही शिक्षा विभाग कुछ बदलाव करने की दिशा में बदला है।

Bihar student struggles: पाठक के अद्भुत और अड़ियल रवैए के कारण वे बिहार में सुर्खियों में रहते हैं। उनके प्रति शिक्षा विभाग में भी बहुत सम्मान है। उनके द्वारा लिए गए निर्णय व सुझावों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है शिक्षा क्षेत्र में। उन्होंने शिक्षा विभाग में कई सुधार किए हैं, जिनसे शिक्षा क्षेत्र में प्रगति हुई है।

हालांकि, उनकी कठोरता की वजह से ही शिक्षा विभाग कुछ समस्याओं का सामना कर रहा है। उनकी कड़ाई से कुछ लोग असंतुष्ट हैं और कुछ मुद्दों पर उन्हें बदलने की मांग कर रहे हैं। इससे पाठक के कुछ निर्णयों पर विवाद भी हो रहा है।

सम्पूर्ण स्थिति में, यह देखा जा सकता है कि पाठक के प्रबल नेतृत्व में शिक्षा विभाग में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन कुछ मुद्दों पर अब तक खासी ध्यान नहीं दिया गया है।

Bihar student struggles: महामहिम राज्यपाल ने जनवरी में ही दर्जनों समस्याओं को उठाया था, जो शिक्षा विभाग में थीं। उन्होंने कहा था कि अगर शिक्षा विभाग अपने कार्यक्षेत्र में स्वतंत्र हस्तक्षेप नहीं करेगा, तो यह बेहतर होगा।

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Bihar student struggles: इस वक्त से लगभग छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन खींच-तान और अस्थिरता की स्थिति अब भी बनी हुई है। पाठ्यक्रम के पूरे होने से लेकर परीक्षाओं के समय पर आयोजन तक, इस खींच-तान का असर अब तक महसूस हो रहा है। इससे शिक्षा विभाग के साथ-साथ शिक्षकों और छात्र-छात्राओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

Bihar student struggles: राज्यपाल ने इसे समझने और सुलझाने का निर्देश दिया है, लेकिन अभी भी समस्याएं हल नहीं हुई हैं। इसे हल करने के लिए शिक्षा विभाग को तत्काल कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में स्थिरता और गुणवत्ता के लिए सुचारू निर्णय और कदम अब अत्यावश्यक हो गए हैं।

 

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